10 काहकि "जो काही जीवन की मरजी राखता छे,
आरू वारला दाहड़ा देखने जूवता छे वो आपसी जीभ क बुराई छे,
आरू आपसा हुटड़ा क छोव
की वात करने छे रूक रये।
11 वो बुराई क साथ छुड़े आरू भलाई ही करू:
वो हावव मिलाप क हेरता, आरू ओका यत्न मा रये।
10 काहकि "जो काही जीवन की मरजी राखता छे,
आरू वारला दाहड़ा देखने जूवता छे वो आपसी जीभ क बुराई छे,
आरू आपसा हुटड़ा क छोव
की वात करने छे रूक रये।
11 वो बुराई क साथ छुड़े आरू भलाई ही करू:
वो हावव मिलाप क हेरता, आरू ओका यत्न मा रये।