2 ओळी हाव चुखलो गाँव आरू नवलो यरूशलेम क सोरगदूत सी यहोवा–भगवान क साते सी आवतो देख्यो, आरू चौ तिनी लुगाई क सारकी होती, जो आपसा दुल्हा क जुगु तियार होयली होय। 3 ओळी हाव राजगाद्दी मा सी कोय काजे मोटा बुल छे यो कयता सुन्यो, देख यहोवा–भगवानन डेरो मानसोन विच मा छे; आरू चे ओको लोगहन होय जायछे, आरू यहोवा–भगवान आपसु तिन्दरे साते रहछे; आरू ओका यहोवा–भगवान होय जाछे। 4 "आरू त्यो ओका डुळान आखा आसा नुछ देसे; आरू एका ओळतेन मोत नी रहवछे, आरू नी शोक, आरू नी रोङनो, आरू नी पीङा, पेहली वात जाती रहवी।"
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