1 ओळी चो मखे बिल्लौरन जीवनन सारको झलकतेली, जीवनन जलन एक नदी देखाड़्यो, जो यहोवा–भगवान आरू गाड़ गाडरा न राजगाद्दी छे निकळीन,
5 आरू ओळी रात नी होयछे, आरू तिनुक दिया आरू दाहड़ान विजाळान जरूरत नी होयछे, काहकि पोरबु यहोवा–भगवान तिनुक विजाळो आपसे, आरू चे जलोमका राज करसे।