28 नबुकदनेसर राजा कयने लागियो "घण वारु छे, शद्रक, मेशक आरु अबेदनगो न परमेश्वर, जो आपसा दुतन क मोकलीन आपसा एनु चाकरियान क वाचाड़ीयो, काहकी या राजान हुकुम नी मानीन थारेत् पर भरसु राखीया, आरु यो विचार करीन आपसा डीलन क बी अर्पण कर दीदा, कि हामु हामरा परमेशवर क छुड़ीन काहला बी देवतान भक्ति नी करजे। 29 हतरान करीन हांव यो हुकुम आपो की देश-देश आरु जाति-जातिन क लोगहन, आरु अलग- अलग भाषा बोलने वाळा माईन जो कोय शद्रक, मेशक आरु अबेदनगो न परमेश्वरन काहय वायकेड़ा करसे, तेखे टुकड़ा- टुकड़ा कर कराड़दिस, आरु हेको घर पुरो बनसे, काहकी असो कोय आरु दिसरो देवता नी हय जो इनिये रीतिये वाचाड़ सके।"