5 आरू तु ओको शिक्षा क, जो तु पोर्य क समान दिदा जाता छे, भूल गया होय:
"हे मारा पोर्या, पोरबु की ताड़ना क हलकी वात नी जान,
आरू जव वो तुखे घुड़के तो साहस नी छुड़।"
6 काहकि पोरबु जिनासे मोंग करता छे,
ओकी ताड़ना भी करता छे, आरू जिनाक पोर्य बनाय लेता छे, ओकी कोड़े भी लागता छे।
7 तुमू दुःख क ताड़ना समझीन सह लेवु; यहोवा–भगवान तुमू पोर्य जानीन तुमरे साथे बर्ताव करता छे। वो कुन सी पोर्य छे जेरी ताड़ना बास नी करता? 8 यदि वो ताड़ना जिन्दरे भागी आखा हुयसे छे, तुमरी नी होयी तो तुमू पोर्या नी, पर व्यभिचार की अवलियाद ठेराये। 9 पछु जव कि हामरे शारीरिक बास भी हामरी ताड़ना कर्या करता हुता आरू हामु इन्दरो विजुत कर्या, तो काय आत्मान बासन आरू भी हको तळे नी रये जिनाछे हामु जीवता रया। 10 वो तो आपसी–आपसी समझ क लारे थुड़ा दाहड़ान करता ताड़ना करता हुता, पर वो तो हामरे लाभन करता छे, कि हामु भी ओकी चुखलान भागी होय जाय। 11 वर्तमान मा हर प्रकार की ताड़ना खुशी की नी, पर शोक ही की वात देखाय पड़ती छे; तौभी जो ओको सहते सहते पक्का होय गया छे, बाद मा इनुक शांती क साथ न्यायपन हर फोव मिवता छे।