26 नी तो धरती की उबजनो छे लीन ओको बार बार दुःख उठाड़नो पड़तो; पर हिमी युग क आखरी मा वो एक ही बार प्रगट होया छे, ताकि आपने ही बलिदान क द्वारा पाप क दूर कर देय।
26 नी तो धरती की उबजनो छे लीन ओको बार बार दुःख उठाड़नो पड़तो; पर हिमी युग क आखरी मा वो एक ही बार प्रगट होया छे, ताकि आपने ही बलिदान क द्वारा पाप क दूर कर देय।