दयाडु सामरिया क दृष्टांत
25 10:25 मत्ती 22:35-40; मरकुस 12:28-34 आरू एक व्यवस्थापक उठ्यो आरू यो कयीन ओकी परीक्षा करने लाग्या, "हे गुरू, अमरकाय जीवन क वारीस हुयने क करता हाव काय करीस?"
26 त्यो ओका सी कयो, "मूसा क व्यवस्था मा काय लिख्या छे? तु कोसो भणता छे?"
27 त्यो उको जवाब देदो, "तु पोरबु आपने यहोवा–भगवान छे आपने सब मन आरू आपने सब जीव आरू आपसी सारी शक्ति आरू आपसी सारी बुध्दी क साथे मोंग राख्यो आरू आपने धडे वावा छे आपने समान मोंग राख्यो।"
28 ईशु ओका सी कयो, "तु ने ठीक जवाब देदो, या कर तो तु जीवतो रवछे।"
29 पुन त्यो आपने आप क न्यायी ठहराने की मरजी छे ईशु छे पुच्छा, "तो मारो धडेवावा कुण छे?"
30 ईशु जवाब दिया, "एक माणुस यरूशलेम छे यरीहो क जाय रया हुता कि डाकु ने घेरकर ओका लुगड़ा उतारीन करता, आरू मारपीट कर उको आदमरतो छुड़ीन चाली गया।" 31 आरू असो हुया कि तीनी मार्ग छे एक पुजारा जाय रया हुता, पुन ओको देख क जाती रयो। 32 इनी रीति छे एक लेवी उना धरती पर आयो, वो भी उको देखीन दिसरे वाट चाली जाय रया हुता। 33 पुन एक सामरि यात्री वाँ आयो आरू उको देखीन तरस खायो। 34 त्यो ओको साथे आवीन ओका घाव पर तेल आरू अंगुर क रस नाखीन पाटू बांधीन, आरू आपसी सवारी पर चढ़ावीन सराय मा ली गया, आरू ओकी सेवा करी। 35 दिसरे दाहडे त्यो दुयी चाँदी क दीनार निकावीन सराय क मालीक क दिया, आरू कयो, "इसकी सेवा करनो, आरू जो काय तारे आरू लागछे, वो हाव पुगीन पर तुके भर देसे।"
36 ईशु ओका सी पुछो, "हिमी तारी समज मा जो डाकु मा घिर गया हुता, इन तीन मा छे ओका धडेवावा कुण ठहराया?"
37 त्यो कयो, "वा जीसने ओको पर दया करी।"
ईशु ओका सी कयो, "जा, तु भी ओसो ही कर।"