अन्यायी न्यायाधीश आरू रंडायली क दृष्टान्त
1 ईशु ओका विषय मा कि नीत्य प्रार्थना करने आरू हीयाव नी छुड़ने जुवे त्यो यो दृष्टान्त क द्वारा सिकाड्या। 2 काही नगर मा एक न्यायी रयता हुता जो नी यहोवा–भगवान सी बीक राखता हुता आरू नी काही मानुस की परवा करता हुता। 3 तीनी नगर मा एक रंडायली भी रयती होती जो ओका साथे आय आवीन कयो करती होती, "मारे न्यायी चुकाकर मखे मुद्दई छे वाचाड़।" 4 काही टेहाव तक तो वो नी मान पुन आखरी मा मन मा विचार कर कयो, "यदि हाव नी यहोवा–भगवान सी बीक राखता हुता आरू नी मानुस की काही परवाह करता छे।" 5 तौभी यो रंडायली मखे सताती रयती छे, अतरान करीन हाव ओको न्याय चुकाड़ता, कयी ओसो नी हाव की घड़ी–घड़ी आवीन आखरी क मारे नाक मा दम कर्या।
6 पोरबु ने कयो, "सोमवु यो अन्यायी न्यायी काय कयता छे?" 7 अतरान करीन काय यहोवा–भगवान आपने नेवाड़ला हुया क न्याय नी चुकाड़से, जो रात–दाहडो ओकी मदत क करता रड़ता मदत क करता आयड़ता रया छे? काय वो ओको विषय मा देर करसे। 8 हाव तुमछे कयता छे, वो छाटोत ओको न्याय चूकाड़छे। तौभी मानुस क पोर्या जव आवसे तो काय वो धरती पर विश्वास देखछे?