19 पछु हाव रूमरे कहवो कदाम तुमरे माईन दूय जन धरती पर काहय वात क करता त्या मांगे, एक मन क हय, तो म्हार बास की तरप सी जो सोरग मा छे ओका करता हुय जासे। 20 "काहकि जा सारी दूय या तीन जन म्हार नाव सी एखटा हुये वा हाव उका वीच मा रहवो।"
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19 पछु हाव रूमरे कहवो कदाम तुमरे माईन दूय जन धरती पर काहय वात क करता त्या मांगे, एक मन क हय, तो म्हार बास की तरप सी जो सोरग मा छे ओका करता हुय जासे। 20 "काहकि जा सारी दूय या तीन जन म्हार नाव सी एखटा हुये वा हाव उका वीच मा रहवो।"