विश्वास योग्य दास आरू दुष्ट दास
45 "कुन छे त्यो विश्वास योग्य आरू अकल वालो, जो मालिक आपसा दास पर ठेकेदार ठहरायो, की टेम पर उन लोगहन क खानो देय?" 46 सयाळो छे, त्यो दास, जिनाक मालिक आवीन असोत् करतलो देखे। 47 हाव तुमूक सी सच कहवो; मालिक ओको आपसी सब धन पर हकदार बनावसे। 48 बाकुन कदाम त्यो दुष्ट दास यो सोचने लाग गियो, कि म्हार मालिकन आवने मा वार छे। 49 आरू आपसा साथी दासन क देने लाग गिया, आरू पियक्कड़ क साथ मा खाय–पीये। 50 ति उना दास क मालिक असला दाहड़ा मा आवसे, जव त्यो ओकी वाट नी देखतो रहवे, आरू असा टेमे कि जिनाक त्यो नी जानतो हय, 51 तव ओको वातड़ी सजा दीन आपीन, आरू उका पापो क कपटी लोगहन क साथ मा गिनसे; वा रड़नो आरू दात पीसनो हुयसे।