53 काहकि तु नी समझियो, कि हाव म्हार बास सी विनती कर सकतो हुतो, आरू त्यो सोरगदूत क बारा सैन्य दल सी जादा मार पास अब भी हजुर कर देसे?
Publicidade
Publicidade
53 काहकि तु नी समझियो, कि हाव म्हार बास सी विनती कर सकतो हुतो, आरू त्यो सोरगदूत क बारा सैन्य दल सी जादा मार पास अब भी हजुर कर देसे?