थारु और जन्नी
1,2 हे जन्नी मनै, तुहुरे फेन अपन थरवक अधिनमे रहो। ताकि यदि तुहुरिन्मेसे केक्रो थरवा परमेश्वरके वचन विश्वास करनासे अस्वीकार करत कलेसे तुहुरे कुछु नै कलेसे फेन तुहुरिन्के व्यवहार देख्के ओइने परमेश्वरहे विश्वास करे सेक्थाँ। जब ओइने तुहुरिन्के शुद्ध और प्रेम भरल व्यवहार देख्हीँ। तब ओइने ख्रीष्टमे विश्वास करहीँ। 3 अपनहे सुग्घुर बनाइक लग अपन भुट्लामे रहर लग्तिक झोँटी ना बनाऊ। और सोन, मोती और बहुत महिँगा लुग्गा लगाके दोसुर जहनके ध्यान अपन ओहोँर ना तानो। 4 तुहुरिन्के भित्री मनमे रहल बात तुहुरिन्हे सुग्घुर बनाइत। उ कलक तुहुरिन्के नरम और शान्त व्यवहार हो, जोन परमेश्वरके लग बहुत किम्ती बा। 5 काकरेकी बहुत पहिलेक जन्नी मनैनके व्यवहार फेन अस्तेहेँ रहिन। ओइन्के जीवन पवित्र रहिन, और ओइने परमेश्वरहे विश्वास और आशा करिँत। उ जन्नी मनै सुग्घुर हुइलाँ, काकरेकी ओइने अपन थरवक अधिनमे बैठिँत। 6 सारक हस, जे अब्राहामहे स्वामी कहिके ओकर आज्ञा पालन करे। उ कलक यदि तुहुरे दोसुर जहनके लग मजा करबो और कौनो बातमे नै डरैबो कलेसे तुहुरे सारक छाईन हस हुइतो।