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एफिसी 5

28 असेँमनअपन-अपन जननहअपन शरहस करिँअपन जनकरत अपनहकरत29 करमनकबअपन शररहकरतओकर कदर करकलपकरत जसिमणडलखदकरथाँ। 30 करहमसकएकशररकअङइती, और शरटकमणडलो। 31 जसिपविरमिखल ा, "मनअपन ई-बरकअपन जनएक, और एकशरिीँ।" 32 एकथिऔर गमिहमी। और िओहोँरसे, यकर लनऔर ुँरमिकरइयनसकरतुँ। 33 पर ििइत; सकअपन-अपन जननहअपन हस करो, और जनमनअपन-अपन थरवक आदर करिँ्।

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