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गलाती 5:16-26

पवित्र आत्मा और मनैनके स्वभाव

16 पर मै कहतुँ, कि तुहुरे पवित्र आत्मक अगुवाइक अनुसार जिओ ताकि तुहुरे पापी शरीरके इच्छा पूरा ना करो। तबजाके तुहुरे उ खराब काम नै करबो। 17 काकरेकी हमार पापी इच्छा पवित्र आत्मक विरोधमे बा, और पवित्र आत्मा हमार पापी इच्छक विरोधमे बा। काकरेकी यी दुनु जाने एकदोसर जहनके दुश्मन हुइँत; तबेकमारे हम्रे हरदम उ मजा काम करे नै सेक्थी जोन काम हम्रे करे चहथी। 18 और यदि तुहुरे पवित्र आत्मक अगुवाइक अनुसार जिथो कलेसे आब तुहुरे मोशक नियम कानुनके अधिनमे नै हुइतो।

19 तुहुरे सक्कु जाने जन्थो कि जोन मनै अपन पापी स्वभावके पाछे नेंग्थाँ, ओइने का-का करथाँ। अथवा ओइने व्यभिचार करथाँ, ओइन्के अशुद्ध सोँच-विचार रथिन, और ओइने कामुकतामे रथाँ। 20 और ओइने मूर्तिहे पुज्थाँ, मन्तुर पहरथाँ। और ओइने अपन संघरियनहे घृणा करथाँ। ओइने एकदोसर जहनसे झगरा खेल्थाँ। और ओइने उ सक्कु चिजके लालच करथाँ जोन चिज दोसुर जहनके थेन रथिन। ओइने महा झत्ति झोँक्काजिथाँ। और ओइने अपन काम बनाइक लग दोसुर मनैनके गोरा तन्थाँ। ओइने उ मनैनहे अस्वीकार करदेथाँ, जेनसे ओइने असहमत रथाँ। और ओइने ओइन्हे किल साथ देथाँ, जेनसे ओइने सहमत रथाँ। 21 ओइने एकदोसर जहनसे हिस्का मुथाँ। ओइने मत्वार पलिरथाँ। और ओइने दलिद्दर हस खाना खैथाँ। और ओइने असिके सक्कु मेरिक खराब काम करथाँ। यनके बारेमे मै तुहुरिन्हे चेतावनी देहतुँ जसिके मै तुहुरिन्हे पहिले फेन चेतावनी देले रहुँ कि जे-जे असिन काम करहीँ, ओइने परमेश्वरके राजके हकदार नै बन्हीँ।

22 जब पवित्र आत्मा हम्रिहिन्हे अगुवाई करत कलेसे हम्रे एकदोसर जहनसे प्रेम कर्थी। खुशी रथी। शान्ति रहत। सँस्सा करे सेक्थी। दोसुर जहनहे दया देखैथी। दोसुर जहनके भलाई कर्थी। एकदोसर जहनकेमे भरोसा रहत। 23 और हमारमे नम्रता रहत। और हम्रे अप्निहीँ अपनहे नियन्त्रण करे सेक्थी। असिन बातके विरोधमे कौनो मोशक नियम कानुन नै हो। 24 पर जेनके सम्बन्ध मुक्तिदाता येशू ख्रीष्टके संग बतिन, ओइने अपन जीवनके पापी स्वभावके खराब इच्छा और चाहनाहे पाछे छोरदेले बताँ।

25 काकरेकी पवित्र आत्मा हम्रिहिन्हे एकथो लावा जीवन देले बताँ। तबेकमारे आऊ, हम्रे अपन जीवनके हरेक क्षेत्रमे पवित्र आत्मक अगुवाइसे अपन जीवन जिई। 26 हम्रे घमण्ड नै करे परत। हम्रे एकदोसर जहनसे रिसाई नै परत। अथवा हम्रे एकदोसर जहनके हिस्का नै मुए परत।

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