अन्तिम अर्ती
1 हम्रे दादू-भैयनके और दिदी बहिन्यनके हस एकदोसर जहनहे प्रेम कर्ती रही। 2 याद कर्ले रहो, परदेशीनहे फेन पहुननके रुपमे सत्कार करे परत। काकरेकी अस्तेहेँके केऊ-केऊ बिना पता पैले स्वर्गदूतनके सत्कार कर्ले बताँ।
3 अप्निहीँ फेन ओइन्के संग कैदमे परल हस झेलमे रहुइयनके ख्याल करो। और अप्निहीँ दुःखमे परल हस अत्याचारमे परल मनैनहे सम्झो। जसिके कि तुहुरे ओइनेहेन्के संग दुःखमे बतो।