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João 2

नगरमजक ि

1 तब सर िरदशकनगरमरहे। वहाँ रहि2 और ुँलनहजमिरहि3 जब रकरस ओरितबुँिकलि, "ओइनरहल रकरस ओरिबति" 4 उहिकलाँ, ", महिैँ करबतइते? टकपमिििसमय अभिआइल ो।" 5 पर ुँिसनवनहकलि, "कहवहकरहो।" 6 आब यहिनकिचलन अनाँइनचलन रहिअसिकरक लग वहाँ पठरक गगरल रहे, रतगगलगभग एक िटर 7 िसनवनहकलाँ, "गगभरो।" तब ओइनगगकरसमभरदाँ। 8 तब िसनवनहकलाँ, "यमरचिरकभलमनसक " तबकमिसनवन ओसेँ करलाँ जसकलाँ। 9 जब मनिभलमनिखल, आब रकरसमबदलगिरहे। और भलमनपतरहिि रकरस कहाँआइलपर िसनवनहपतरहितबभलमनबलकहल, 10 "हरघरगयन पहिसकनसमजरकरस ाँ। और जब िमननकबति, तब ओइनससरकरस ाँ। पर अपि मजरकरस अभिनसम रल बती।" 11 रदशकनगरमअपन चमतरकअपन महिरकट करलाँ। तबुँलनकुँरमिकरलाँ।

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