17,18 हरद रजव बहत आघ अपन भय फलपक जनन हरदयसस भज करल रह। पर डबक दहइय यहनन हरद रजवह कहल रह, "अपन भय जतत रहतसम परमशवरक अगमवकत मशक नयम कनन अनसर ओकर जननस भज करन मज न ह!" तबकमर हरदयसह खश करक लग हरद रजव डबक दहइय यहननह पकरवक करगरम दरदहल।
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