कष्ट और परीक्षा
2 हे मोरिक विश्वासी भैयो, जब तुहुरिन्केमे मेरमेरके परीक्षा आई कलेसे यिहिहे तुहुरे बहुत आनन्दके बात सम्झहो। 3 काकरेकी तुहुरे जन्थो कि जब तुहुरिन्के विश्वास जाँचजाइत, तब तुहुरिन्के सहनशीलता बह्रत। 4 अपन परीक्षक समयमे परमेश्वरकेमे अपन भरोसा धर्ले रहहो, ताकि तुहुरे आत्मिक रुपसे परिपक्व और सिद्ध हुइती जाऊ। और तुहुरिन्केमे कौनो फेन मजा चरित्रक कमि ना रहे।
22 तुहुरे परमेश्वरके वचन पालन करुइया बनो। उहिहे सुनके किल तुहुरे अपनहे धोखा ना देऊ। 23 काकरेकी यदि तुहुरे परमेश्वरके वचनहे सुन्थो किल और ओकर पालन नै करथो कलेसे तुहुरे उ मनैनके हस हुइतो, जेने ऐनामे अपन मुहाँर हेरथाँ। 24 और जस्तेके ओइने ऐनक आघेसे हट्जिथाँ, ओस्तेके जुरतेहेँ ओइने बिस्राजिथाँ कि ओइने कसिन देखाइतिहिँत। 25 पर उ मनैया जे परमेश्वरके सिद्ध मोशक नियम कानुनहे ध्यानसे पह्रत। जोन मोशक नियम कानुन मनैनहे पापमेसे स्वतन्त्र कराइत। और ज्या ऊ सुनल बा उहिहे ऊ नै बिस्राइत। पर ओस्तेहेँ करत जसिके मोशक नियम कानुन उहिहे सिखैथिस। यहे कारणसे परमेश्वर ओकर हरेक काममे उहिहे आशिष दिहीँ।