22 पर आंग का वे हिस्सो जो दुसरा जन से निर्बल देखी पडस हइ, भोत ही जरुरती हइ. 23 अरु आंग खे जिन हिस्साहोन खे हम कम आदरणीय समझस हइ उन्ही खे हम जादा आदर देस हइ. अरु हमारी शोभाहीन हिस्सा अरु भी भोत शोभायमान हुइ जास हइ, 24 फिर भी हमारो शोभायमान हिस्साहोन खे येको प्रयोजन नी, पर परमेश्वर ने आंग खे असो बनय दियो हइ कि जो हिस्सा खे घटी थी ओ खे अरु भी भोत आदर होनु.
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