मसीह को दुख उधाहरण
18 हे सेवक, अपना आप खे स्वामी का सामने रख अरु उनका पूरी रिती से सम्मान देस का नी फक्त उनका जो अच्छो हइ अरु दुसरा का लिये चिता करस हइ क्युकी उनका भी जो कठोर हइ.
18 हे सेवक, अपना आप खे स्वामी का सामने रख अरु उनका पूरी रिती से सम्मान देस का नी फक्त उनका जो अच्छो हइ अरु दुसरा का लिये चिता करस हइ क्युकी उनका भी जो कठोर हइ.