44 अरु सब विश्वास करणआला जमा र्हेता था, अरु उनकी सब चिजहोन हिस्सा मे थी. 45 वे अपनी अपनी सम्पत्ति अरु सामन बेची खे जसी जोकी जरुरत होती थी बाट दिया करता था. 46 वे हरदिन एक मन हुइखे मन्दिर मे जमा होता था, अरु घर घर मे रोटी तोडता हुया आनन्द अरु मन की सीधाइ से भोजन कर्या करता था. 47 अरु परमेश्वर की स्तुती करता था, अरु सब दुन्या उनसे खुश था अरु जो उध्दार पाता था.उनको प्रभु हरदिन उनमे मुल्य देतो थो.
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