8 हुशार र्हेव कि कोय तुमखे उ तत्व ज्ञान अरु व्यर्थ धोका वजेसे अपनो अहेर नी बनय ले, जो इन्सान की रितीरिवाज अरु जगत की सब पयली शिक्षा का जसो तो हइ, पर मसीह को जसो नी.
18 कोय इन्सान आत्मा हिनता अरु स्वर्गदूतहोन की पुजा करीखे हुयो दौडी खे प्रतीफल से बाहेर नी करु. इन्सान देख्यो हुयो बात मे लग्यो र्हेस हइ अरु अपना शारीरिक समज पर व्यर्थ फुलस हइ,
मसीह को सात मरनो अरु जिनो
20 जब कि तुम मसीह का सब जगत कि पयली शिक्षा का तरप से मरी गया हय, ते फिर का उनका सामने जो जगत को हइ जिवन बितस हय? तुम असो विधीहोन का बस मे कायबर ऱ्हेस हय, 21 कि यो नी पकड्यो, ओखे नी चाट्यो, अरु ओखे हात नी लगानु? 22 यो सब चिजहोन काम मे लाते खतम हुय जाह्ये क्युकि ये इन्सान की आज्ञाहोन अरु शिक्षाहोन का जसो हइ. 23 या विधीहोन मे या इच्छा का जसो गडी वालि भक्ति कि रीति, अरु आत्मा हीनता, अरु शारीरीक योगभास को भाव से ज्ञान को नाम तो हइ, पन आंग लालुचहोन खे रोखना मे येका से कुच भी फायदो नी होतो.