मसीह कि आंग कि एकता
1 येका लिये मी, जो प्रभु का लिये बन्दी हूये खे तरा से अरु प्रार्थना करुस हय कि तुम्हारी जीवन शैली तुम्हारा बुलाना का अनुरुप हइ 2 तुम मे विशुद्ध विनम्रता, सौम्यता अरु धीरज का एक दुसरा मे प्रेम मे सहन को भाव भरी जाए. 3 अरु मेल को बन्धन मे आत्मा कि एक रखन को यत्न कर. 4 एक ही आंग हइ अरु एक ही आत्मा जेमे तुम्ह बुलायो गया था अपना बुलायो जाना से एक ही आस हइ. 5 एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा 6 अरु सब मानवजाति, बाप हय, जो सब, उपर, सब का बीच अरु सब मे एक ही परमेश्वर हइ.
7 पन हमने से हर एक खे मसीह को वरदान को परिमाण, जसो अनुग्रह प्रदान कर्यो गया हइ, 8 येका लिये व्हा बोलस हइ,
जब व्हा सबसे उच्चा पर चडी गयो,
बन्दिहोन खे बन्दी बनय खे ली गया अरु
उनने इन्सान खे दान दियो.
9 ओका चडना से, अरु का अर्थ मील्यो जास हइ फक्त यो कि व्हा जमीन का नीच्चे कि जगा मे उतार्यो भी थो. 10 स्वर्ग से जो नीचे उतर्यो, उ हइ, जो उच्ची जगा मे बडो सम्मान का साथ चड्या कि सब सृष्टि को पूरोपूरो करी दे. 11 उनने मंडली खे कुछ प्रेरित, कुछ भविष्यव्दक्ता का कुछ इश्वरी सुसमाचार सुनानवाआलो अरु कुछ मंडली को रखवाली उपदेशक प्रदान कर्यो 12 कि पवित्र सेवा, लिये सुसज्जित कर्यो जाह्ये का कि मसीह का आंग उन्नती बडती जाये.