2 तुम मे विशुद्ध विनम्रता, सौम्यता अरु धीरज का एक दुसरा मे प्रेम मे सहन को भाव भरी जाए. 3 अरु मेल को बन्धन मे आत्मा कि एक रखन को यत्न कर.
2 तुम मे विशुद्ध विनम्रता, सौम्यता अरु धीरज का एक दुसरा मे प्रेम मे सहन को भाव भरी जाए. 3 अरु मेल को बन्धन मे आत्मा कि एक रखन को यत्न कर.