2 तुम मे विशुद्ध विनम्रता, सौम्यता अरु धीरज का एक दुसरा मे प्रेम मे सहन को भाव भरी जाए. 3 अरु मेल को बन्धन मे आत्मा कि एक रखन को यत्न कर. 4 एक ही आंग हइ अरु एक ही आत्मा जेमे तुम्ह बुलायो गया था अपना बुलायो जाना से एक ही आस हइ. 5 एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा 6 अरु सब मानवजाति, बाप हय, जो सब, उपर, सब का बीच अरु सब मे एक ही परमेश्वर हइ.
Publicidade