दस कुव्वारीहोन को दृष्टान्त
1 तब स्वर्ग का राज्य वे दस कुव्वारीहोन का जसो हुये जो अपनी मशाल लीखे दुल्हा से मीलन करण का लिये नीकली. 2 ओमे पाच मूर्ख अरु पाच समझदार थी. 3 मूर्खहोन ने अपनी मशाल तो ली, पन अपना सात तेल नी लियो 4 पन समझदारहोन ने अपना मशाल का सात अपनी सीसी मे तेल भी भरी लियो. 5 जब दुल्हा खे आना मे देर हुय, ते वे सब जपन लगी, अरु सोय गय.
6 आधी रात खे धुम मची की देख, दुलो अय रोस हइ, ओकासे दान करण का लिये चल. 7 तब वे सब कुव्वारीहोन उठीखे अपनी मशाल बरोबर करण लगी. 8 अरु मूर्खहोन ने समझदारहोन से बोल्यो. अपना तेल मे से कुछ हमखे भी दे, क्युकी हमारी मशालहोन बुझी ऱ्हीस हइ. 9 पन समझदाहोन ने उत्तर दियो की कही हमारा अरु तुमारा लिये पुरो नी हुये. ते अच्छो तो यो हइ, की तुम बेचनआला का पास जयखे अपना लिये तेल मोल ले. 10 जब वे मोल लेन खे जय ही री थी, ते दुलो ए पोच्यो, अरु जो पाच तैयार थी, वे ओका सात भ्याव का भवन मे चली गय अरु दरवाजो बन्द करी दियो.
11 येका बाद वे दुसरी कुव्वारीहोन भी अयखे बोलन लगी, हे स्वामी, हे स्वामी, हमारा लिये दरवाजो खोली दे. 12 दुल्हा ने उत्तर दियो, की मी तुम से सच्ची बोलुस हइ, मी तुमखे नी पहचानुस हइ.
13 " क्यु कि जागता! ऱ्हे, नी तुम उ दिन खे जानस हइ, नी उ टेम खे.