17 बुराइ खे कोय से बुरो नी करणु. जो बात सब दुन्याहोन का लिये अच्छो हइ, ओकि चिता कऱ्या कर. 18 जहा तक हुए सकस, तुम भरी सब इन्सान का साथ मे शांती मे ऱ्हे. 19 हे प्रिय, बदलो नी लेनु, पन परमेश्वर खे घुस्सा का अवसर दे, क्युकि लिख्यो हइ, "बदलो लेनो मरो काम हइ, प्रभु बोलस हइ मी हि बदली दियु." 20 पन "अगर तरा बिना भूको हुए ते ओखे खानो खलइ खे अगर दुसरो हुये ते दुशमन खे पानी पिलय सक्यु क्युकि असा करणा से तु ओका माथा पर अगार से अंगारा को ढेर लगास." 21 बुरा से नी हुया, पन भला से बुरा खे जिती ले.
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