हमारा अंदर वाद विवाद
14 हम जानस हइ कि व्यवस्था ते आत्मीक हइ, पन मी आंग का अरु पाप का हात बिक्यो हुयो हइ. 15 जो मी नी करस हुये ओखे नी जानस क्युकी जो मी चास हूये वो नी कऱ्यो करस, पन जेका से मेखे घुसा आस हइ उ करस हुये. 16 अगर जो मी नी चाउस वो करस हइ ते मी मानी लीयुस हुये की व्यवस्था भली हइ. 17 ते असो भाग मे ओको करणवालो मी नी, जब पाप हइ जो मेखे बट्यो हुयो हइ.