संसार से दोस्ती
1 तुम मे लडाइहोन अरु वाद विवाद बोलना से अय गो? का उ सुख-विलास से नी जो तुमारो आंग होन मे लगास हइ 2 तुम लालुच करतो हुये, अरु तुमखे मीले नी. येकालिये तुम मारस. तुम पुरी रिती से इच्छा रखस हुये, अरु कुछ मील्हे नी करी पास. ते तुम झगडस अरु लडता हुये. तुमखे येकालिये नी मीले की तुम परमेश्वर से मागे नी. 3 तुम मागे हुये अरु पास नी येकालिये कि बुरी इच्छा से मागंस हुये, ताकि अपनो सुख-विलास मे उड्य दे. 4 हे व्यभिचारणी हीन दुन्या का तुम नी जानस कि संसार से दोस्ती करणो परमेश्वर से बैर करणो हइ जो कोय संसार को दोस्त होनु चाहिए हइ उ अपना आपखे परमेश्वर को दुसमन बनास हइ. 5 का तुम यो समझस हुये कि पवित्रशास्त्र व्यर्थ बोलस हइ, "जो आत्मा को ओने हमारो बाजु बढाड्यो हइ, का वो असो लालच करस हइ जेको प्रतीफल जलन हुये." 6 वो तो अरु भी अनुग्रह देस हइ. ओका कारण यो लिख्यो हइ, "परमेश्वर अभिमानीहोन को विरोध करस हइ, पर दिन पर अनुग्रह करस हइ."