4 नी याव हुय जो दुसरा अन सेवक मा दोष हचत्या? आऊन स्थिर ईरोद या बिदोगोद आऊन स्वामी से अच संबंध ईटतद; बल्की आव स्थिर अच माळकु आदान, यतिकी प्रभु आऊक स्थिर ईट सकतान.
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4 नी याव हुय जो दुसरा अन सेवक मा दोष हचत्या? आऊन स्थिर ईरोद या बिदोगोद आऊन स्वामी से अच संबंध ईटतद; बल्की आव स्थिर अच माळकु आदान, यतिकी प्रभु आऊक स्थिर ईट सकतान.