1 अत जब मसह न शरर म दख उठय, त तम भ उस अभपरय स अपन हथयर बध ल—कयक ज शरर म दख उठत ह वह पप स छट जत ह— 2 तक शरर म अपन शष जवन मनषय क ललसओ क अनसर नह बलक परमशवर क इचछ क अनसर बतओ। 3 कयक तमन पहल ह बहत समय गरयहदय क इचछ क अनसर कम करन, कमकत, ललसओ, मतवलपन, रगरलय, पयककड़पन और घणत मरतपज म पड़कर गव दय ह। 4 व इस बत स चकत हत ह क तम अब ऐस भर दरचर म उनक सथ नह दत, और इसलए व तमहर नद करत ह; 5 व त उस अपन लख दग, ज जवत और मतक क नयय करन क तयर ह।
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