मसीह का अनुसरण
1 अतः जब मसीह ने शरीर में दुःख उठाया, तो तुम भी उसी अभिप्राय से अपने हथियार बाँध लो—क्योंकि जो शरीर में दुःख उठाता है वह पाप से छूट जाता है— 2 ताकि शरीर में अपना शेष जीवन मनुष्यों की लालसाओं के अनुसार नहीं बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिताओ। 3 क्योंकि तुमने4:3 कुछ हस्तलेखों में "तुमने" के स्थान पर "हमने" लिखा है। पहले ही4:3 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "जीवन का" लिखा है। बहुत समय गैरयहूदियों की इच्छा के अनुसार काम करने, कामुकता, लालसाओं, मतवालेपन, रंगरेलियों, पियक्कड़पन और घृणित मूर्तिपूजा में पड़कर गँवा दिया है। 4 वे इस बात से चकित होते हैं कि तुम अब ऐसे भारी दुराचार में उनका साथ नहीं देते, और इसलिए वे तुम्हारी निंदा करते हैं; 5 वे तो उसे अपना लेखा देंगे, जो जीवितों और मृतकों का न्याय करने को तैयार है।