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पतरस की पहली पत्री 4

मसअनसरण

1 अतजब मसशरें ुःउठा, उसअभिअपनहथिाँो—ोंि शरें ुःउठवह ै— 2 ि शरें अपनवन मनों लसअननहीं बलि परम्‍वर इचअनि3 ोंि मन4:3 कुछ हस्तलेखों में "तुमने" के स्थान पर "हमने" लिखा है। पहल4:3 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "जीवन का" लिखा है। बहसमय रयहिों इचअनकरने, कता, लसं, मतवपन, गरिों, ियक्‍कड़पन और ििें पड़कर िै। 4 इस चकिैं ि अब ऐसें उनकनहीं े, और इसलििंकरतैं; 5 उसअपनेंे, िों और तकों करनै।

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