2 ताकि शरीर में अपना शेष जीवन मनुष्यों की लालसाओं के अनुसार नहीं बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिताओ। 3 क्योंकि तुमने पहले ही बहुत समय गैरयहूदियों की इच्छा के अनुसार काम करने, कामुकता, लालसाओं, मतवालेपन, रंगरेलियों, पियक्कड़पन और घृणित मूर्तिपूजा में पड़कर गँवा दिया है। 4 वे इस बात से चकित होते हैं कि तुम अब ऐसे भारी दुराचार में उनका साथ नहीं देते, और इसलिए वे तुम्हारी निंदा करते हैं; 5 वे तो उसे अपना लेखा देंगे, जो जीवितों और मृतकों का न्याय करने को तैयार है। 6 क्योंकि मृतकों को भी सुसमाचार इस कारण सुनाया गया, कि शरीर में भले ही उनका न्याय मनुष्यों की रीति पर हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्वर की रीति पर जीवित रहें।
7 सब बातों का अंत निकट आ गया है। इसलिए संयमी बनो, और प्रार्थना के लिए सचेत रहो,