24 मैंने पाँच बार यहूदियों से उनतालीस-उनतालीस कोड़े खाए। 25 तीन बार मुझे बेंतों से पीटा गया, एक बार मुझ पर पथराव हुआ, तीन बार मेरा जहाज़ दुर्घटनाग्रस्त हुआ, मैंने एक रात और एक दिन समुद्र में काटा। 26 मैं बार-बार यात्राओं में, नदियों के खतरों में, डाकुओं के खतरों में, अपनी ही जाति के लोगों से उत्पन्न खतरों में, गैरयहूदियों से उत्पन्न खतरों में, नगर के खतरों में, जंगल के खतरों में, समुद्र के खतरों में, झूठे भाइयों के खतरों में रहा। 27 मैंने परिश्रम और कष्ट में, रात-रात भर जागने में, भूख और प्यास में, बार-बार निराहार रहने में, ठंड में और उघाड़े रहने में समय बिताया है।
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कुरिंथियों की दूसरी पत्री 11
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