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कुरिंथियों की दूसरी पत्री 5

11 अतहम रभभय नतों समझैं, परपरम्‍वर मनहमदशपष्‍और ैं आशकरतूँ ि िें पष्‍ी। 12 हम मनिअपनरशनहीं कर रहैं बलि ें हम पर गरकरनअवसर रहैं ि उनें उततर सकमन पर नहीं बलि िपर घमकरतैं। 13 यदि हम ैं परम्‍वर िैं, और यदि ें ैं िैं। 14 मसहमें िवश करतोंि हमें यह ि्‍चय ि जब एक सब िमरसब मर गए; 15 और वह सब िमरा, ि िैं अब अपनिबलि उसकिउनकिमरऔर िउठा।

ल-मि

16 इसलिअब हम िशरअननहीं समझेंे। यदयपि हमनमसशरअना, िअब हम उसनहीं नते। 17 अतयदि मसें वह नई ्‍ि ै। ें गई ैं; ो, सब नई गई ैं। 18 यह सब परम्‍वर ओर ै, िसन5:18 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "यीशु" लिखा है। मसअपनहमल-मिकर िा, और हमें ल-मिौंै; 19 अरपरम्‍वर मसें कर अपनल-मिकर िऔर उनकअपरों उन पर नहीं लगा, और ल-मिवचन हमें ौंिै। 20 इसलिहम मसजदैं और परम्‍वर हमसमझै; हम मसओर िनतकरतैं ि परम्‍वर ल-मिकर ो। 21 वह अनजा, उसपरम्‍वर हमिठहरि हम उसमें परम्‍वर िकतबन ँ।

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