पृथ्वी की फसल की कटनी
14 तब मैंने दृष्टि की, तो देखो एक श्वेत बादल था और उस बादल पर मनुष्य के पुत्र जैसा कोई बैठा था, जिसके सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में तेज़ धारवाला हँसिया था। 15 फिर मंदिर में से एक और स्वर्गदूत निकला, और उससे जो बादल पर बैठा था ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहने लगा, "अपना हँसिया चला, और फसल काट, क्योंकि कटनी का समय आ पहुँचा है और पृथ्वी की फसल पक चुकी है।" 16 तब जो बादल पर बैठा था, उसने अपना हँसिया पृथ्वी पर चलाया और पृथ्वी की फसल काटी गई।