18 उसकी शहरपनाह सूर्यकांत मणि से बनी थी और नगर स्वच्छ काँच के समान शुद्ध सोने का था। 19 नगर की शहरपनाह की नीवें हर प्रकार के बहुमूल्य पत्थरों से सुसज्जित थीं : पहली नींव सूर्यकांत मणि की, दूसरी नीलम, तीसरी स्फटिक, चौथी मरकत, 20 पाँचवीं गोमेद, छठी माणिक्य, सातवीं पीतमणि, आठवीं पेरोज, नवीं पुखराज, दसवीं लहसनिया, ग्यारहवीं धूम्रकांत और बारहवीं चंद्रकांत की थी। 21 बारह फाटक बारह मोतियों के थे, एक-एक फाटक एक-एक मोती का था; और नगर की सड़क पारदर्शी काँच के समान शुद्ध सोने की थी।
प्रकाशितवाक्य 21:18-21
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- OHSS Hindi Contemporary Version
18 शहरपनाह सूर्यकांत मणि की तथा नगर शुद्ध सोने का बना था, जिसकी आभा निर्मल कांच के समान थी. 19 शहरपनाह की नींव हर एक प्रकार के कीमती पत्थरों से सजायी गयी थी: पहला पत्थर था सूर्यकांत, दूसरा नीलकांत, तीसरा स्फटिक, चौथा पन्ना 20 पांचवां गोमेद, छठा माणिक्य, सातवां स्वर्णमणि; आठवां हरितमणि; नवां पुखराज; दसवां चन्द्रकांत; ग्यारहवां धूम्रकांत और बारहवां नीलम. 21 नगर के बारहों द्वार बारह मोती थे—हर एक द्वार एक पूरा मोती था तथा नगर का प्रधान मार्ग शुद्ध सोने का बना था, जिसकी आभा निर्मल कांच के समान थी.
- IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019
18 उसकी शहरपनाह यशब की बनी थी, और नगर ऐसे शुद्ध सोने का था, जो स्वच्छ काँच के समान हो। 19 उस नगर की नींवें हर प्रकार के बहुमूल्य पत्थरों से संवारी हुई थीं, पहली नींव यशब की, दूसरी नीलमणि की, तीसरी लालड़ी की, चौथी मरकत की, (यशा. 54:11,12) 20 पाँचवी गोमेदक की, छठवीं माणिक्य की, सातवीं पीतमणि की, आठवीं पेरोज की, नौवीं पुखराज की, दसवीं लहसनिए की, ग्यारहवीं धूम्रकान्त की, बारहवीं याकूत की थी। 21 और बारहों फाटक, बारह मोतियों के थे; एक-एक फाटक, एक-एक मोती का बना था। और नगर की सड़क स्वच्छ काँच के समान शुद्ध सोने की थी।
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