11 मैंशीघ्र आ रहा हूँ;जो कुछ तेरे पास है उसे दृढ़ता से थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले।
12 "जो जय पाए मैं उसे अपने परमेश्वर के मंदिर का स्तंभ बनाऊँगा। वह फिर कभी वहाँ से बाहर न निकलेगा, और मैं उस पर अपने परमेश्वर का नाम और अपने परमेश्वर के नगर अर्थात् उस नए यरूशलेम का नाम जो मेरे परमेश्वर के स्वर्ग से उतरेगा, और अपना नया नाम लिखूँगा।