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प्रेरितों के कार्य 16:16-34

पौलुस और सीलास बंदीगृह में

16 फिर ऐसा हुआ कि जब हम प्रार्थना के स्थान की ओर जा रहे थे तो हमें एक दासी मिली जिसमें भविष्य बतानेवाली आत्मा थी; वह भविष्य बताकर अपने स्वामियों के लिए बहुत धन कमा लाती थी। 17 वह पौलुस और हमारे पीछे आकर चिल्‍लाने लगी, "ये लोग परमप्रधान परमेश्‍वर के दास हैं, जो तुम्हें उद्धार का मार्ग बताते हैं।" 18 ऐसा वह बहुत दिन तक करती रही। तब पौलुस दुःखी होकर मुड़ा और उस आत्मा से कहा, "मैं तुझे यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देता हूँ, उसमें से निकल जा!" और वह उसी घड़ी निकल गई। 19 परंतु जब उसके स्वामियों ने देखा कि उनकी कमाई की आशा समाप्‍त हो गई, तो वे पौलुस और सीलास को पकड़कर अधिकारियों के पास चौक पर खींचते हुए ले गए, 20 और उन्हें मुख्य न्यायाधीशों के सामने लाकर कहा, "ये लोग यहूदी हैं और हमारे नगर में बड़ी गड़बड़ी फैला रहे हैं, 21 और वे ऐसी रीतियों का प्रचार कर रहे हैं जिन्हें मानना या जिन पर चलना हम रोमियों के लिए उचित नहीं।" 22 तब भीड़ इकट्ठी होकर उन पर चढ़ आई, और मुख्य न्यायाधीशों ने उनके वस्‍त्र फाड़कर उतरवाए और आदेश दिया कि उन्हें बेंत लगाए जाएँ। 23 बहुत बेंत लगाने के बाद उन्होंने उन्हें बंदीगृह में डाल दिया, और बंदीगृह के अधिकारी को आज्ञा दी कि उन्हें कड़े पहरे में रखे। 24 उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्हें बंदीगृह के भीतरी भाग में डाल दिया और उनके पैर काठ में जकड़ दिए।

बंदीगृह से छुटकारा

25 आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना कर रहे थे और परमेश्‍वर के भजन गा रहे थे, और बंदी उनकी सुन रहे थे। 26 तभी अचानक एक बड़ा भूकंप आया जिससे बंदीगृह की नींवें हिल गईं और तुरंत सब द्वार खुल गए और सब के बंधन खुल गए। 27 बंदीगृह का अधिकारी जाग उठा और बंदीगृह के द्वारों को खुले देखकर उसने सोचा कि बंदी भाग गए हैं, और वह तलवार खींचकर अपने आपको मारने ही वाला था, 28 कि पौलुस ने ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, "अपने आपको हानि न पहुँचा, क्योंकि हम सब यहीं हैं।" 29 तब वह दीपक मँगवाकर भीतर दौड़ा, और काँपता हुआ पौलुस और सीलास के सामने गिर पड़ा; 30 और उन्हें बाहर लाकर कहने लगा, "सज्‍जनो, मुझे उद्धार पाने के लिए क्या करना चाहिए?" 31 उन्होंने कहा, "प्रभु यीशु पर विश्‍वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।" 32 तब उन्होंने उसे और उसके घर के सब लोगों को प्रभु का वचन सुनाया। 33 फिर रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जाकर उनके घाव धोए, और तुरंत उसने और उसके सारे घराने ने बपतिस्मा लिया। 34 तब उसने उन्हें अपने घर में लाकर उनके सामने भोजन परोसा, और सारे घराने समेत परमेश्‍वर पर विश्‍वास करके आनंद मनाया।

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