35 मैंने तुम्हें सब बातों में दिखाया कि इसी प्रकार परिश्रम करके निर्बलों को संभालना, और प्रभु यीशु के उन वचनों को स्मरण रखना अवश्य है, जो उसने स्वयं कहे :‘लेने से देना धन्य है।’ "
36 ये बातें कहकर उसने अपने घुटने टेके और उन सब के साथ प्रार्थना की। 37 तब वे सब बहुत रोए और पौलुस को गले लगाकर उसे चूमने लगे। 38 वे विशेषकर इस बात से शोकित थे, जो उसने कही थी कि तुम मेरा मुँह फिर न देखोगे। तब उन्होंने उसे जहाज़ तक पहुँचाया।