साहस के लिए प्रार्थना
23 वे छूटकर अपने लोगों के पास आए और जो कुछ मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों ने उनसे कहा था, कह सुनाया। 24 जब उन्होंने यह सुना तो एक मन होकर ऊँची आवाज़ से परमेश्वर को पुकारा, "हे स्वामी, तू वही है जिसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है सब को बनाया। 25 तूने पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे पिता, अपने सेवक दाऊद के मुँह से कहा :
गैरयहूदियों ने क्यों हुल्लड़ मचाया
और लोगों ने व्यर्थ बातें क्यों गढ़ीं?
26 प्रभु के विरुद्ध और उसके अभिषिक्त4:26 अर्थात् मसीह के विरुद्ध पृथ्वी के राजा खड़े हुए
और शासक एक साथ इकट्ठे हुए।4:26 भजन 2:1-2
27 "क्योंकि सचमुच तेरे पवित्र सेवक यीशु के विरुद्ध, जिसका अभिषेक तूने किया, हेरोदेस और पुंतियुस पिलातुस भी गैरयहूदियों और इस्राएल के लोगों के साथ इस नगर में इकट्ठे हुए, 28 कि वे वही करें जिसका होना तेरे सामर्थ्य और तेरी योजना में पहले से निर्धारित था। 29 अब, हे प्रभु, उनकी धमकियों को देख, और अपने दासों को वरदान दे कि तेरा वचन पूरे साहस के साथ सुनाएँ, 30 और साथ ही तू अपना हाथ बढ़ा कि तेरे पवित्र सेवक यीशु के नाम से चंगाई और चिह्न और अद्भुत कार्य हों।" 31 जब वे प्रार्थना कर चुके तो जिस स्थान पर वे इकट्ठे थे, वह हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए, और साहस के साथ परमेश्वर का वचन सुनाने लगे।