विश्वासियों की सहभागिता
32 विश्वास करनेवालों का समूह एक मन और एक चित्त था, और कोई भी अपनी संपत्ति को अपनी नहीं कहता था, बल्कि उनका सब कुछ साझे का था। 33 प्रेरित बड़े सामर्थ्य के साथ प्रभु यीशु के पुनरुत्थान की साक्षी देते थे। उन सब पर बड़ा अनुग्रह था। 34 उनमें से किसी को भी कोई अभाव न था क्योंकि जिस किसी के पास भूमि या घर थे वे उन्हें बेचकर उनका मूल्य लाते 35 और प्रेरितों के चरणों में रख देते थे; और जिस किसी को जैसी आवश्यकता होती थी उसके अनुसार उसे बाँट दिया जाता था।