परमेश्वर की आत्मिक आशिषें
3 धन्य है परमेश्वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जिसने मसीह में हमें स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशिषों से भरपूर किया है। 4 उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले उसमें चुन लिया कि हम उसके सामने प्रेम में पवित्र और निर्दोष रहें, 5 और उसने अपनी इच्छा के भले उद्देश्य के अनुसार अपने लिए पहले से ठहराया कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, 6 ताकि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो जो उसने अपने प्रिय में हमें उदारता से दिया; 7 उसी में हमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा और अपराधों की क्षमा मिलती है। यह परमेश्वर के उस अनुग्रह के धन के अनुसार है 8 जो उसने संपूर्ण बुद्धि और समझ के साथ हमें बहुतायत से दिया 9 और अपनी इच्छा के भेद को अपने उस भले उद्देश्य के अनुसार हम पर प्रकट किया जो उसने मसीह में निर्धारित किया था 10 कि समयों के पूर्ण होने पर ऐसा प्रबंध हो कि जो स्वर्ग में है और जो पृथ्वी पर है, सब मसीह में एकत्रित हों। 11 उसी में जिसमें हम भी उसके उद्देश्य के अनुसार, जो अपनी इच्छा के निर्णय के अनुसार सब कुछ करता है, पहले से ही उत्तराधिकारी ठहराए गए हैं, 12 ताकि हम, जिन्होंने पहले से मसीह पर आशा रखी है, उसकी महिमा की स्तुति का कारण बनें। 13 उसी में जब तुमने सत्य का वचन अर्थात् अपने उद्धार का सुसमाचार सुना और उस पर विश्वास भी किया, तो तुम पर प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की मुहर लगी, 14 जो उसके मोल लिए हुओं के छुटकारे तक हमारे उत्तराधिकार का बयाना है, ताकि उसकी महिमा की स्तुति हो।