मसीह की देह में एकता
1 इसलिए, मैं जो प्रभु में बंदी हूँ, तुमसे आग्रह करता हूँ कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए हो, उसके योग्य चाल चलो, 2 संपूर्ण दीनता और नम्रता के साथ धैर्य रखते हुए प्रेम में एक दूसरे की सह लो, 3 और मेल के बंधन में आत्मा की एकता बनाए रखने का पूरा प्रयत्न करो। 4 एक ही देह है और एक ही आत्मा है; जिस प्रकार तुम भी अपनी बुलाहट की एक ही आशा में बुलाए गए थे। 5 एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा, 6 एक ही परमेश्वर और सब का एक ही पिता है जो सब के ऊपर, सब के मध्य और4:6 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "तुम" लिखा है। सब में है।
7 परंतु हममें से प्रत्येक को मसीह के दान के परिमाण के अनुसार अनुग्रह दिया गया है। 8 इसलिए वह कहता है :
जब वह ऊँचे पर चढ़ा तो बंदियों को बंधुआई में ले गया,
और उसने मनुष्यों को दान दिए।4:8 भजन 68:18
9 (अब "वह चढ़ा" का अर्थ यह छोड़ और क्या है कि वह4:9 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "पहले" लिखा है। पृथ्वी के निचले स्थानों में उतरा भी था? 10 और जो नीचे उतरा वह वही है जो सारे आकाशों से भी ऊपर चढ़ा कि वह सब कुछ परिपूर्ण करे।) 11 उसने कुछ को प्रेरित, और कुछ को भविष्यवक्ता, और कुछ को सुसमाचार प्रचारक और कुछ को चरवाहे4:11 या, पास्टर और शिक्षक नियुक्त करके दे दिया, 12 कि पवित्र लोग सेवाकार्य के योग्य हो जाएँ जिससे मसीह की देह की तब तक उन्नति हो,