5 तमहर जवन लभ-रहत ह और ज तमहर पस ह उसम सतषट रह। उसन सवय कह ह : म तझ कभ न छड़ग, और न कभ तयगग। 6 इसलए हम सहस क सथ कहत ह :
परभ मर सहयक ह,
म न डरग;
मनषय मर कय कर सकत ह?
5 तमहर जवन लभ-रहत ह और ज तमहर पस ह उसम सतषट रह। उसन सवय कह ह : म तझ कभ न छड़ग, और न कभ तयगग। 6 इसलए हम सहस क सथ कहत ह :
परभ मर सहयक ह,
म न डरग;
मनषय मर कय कर सकत ह?