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यूहन्‍ना रचित सुसमाचार 15

सच्‍खलत

1 "सच्‍खलतैं ूँ, और ििै। 2 रतझमें और फल नहीं ी, उसवह टतै, और रतफल उसवह ाँटतै, ि और अधिफल 3 अब उस वचन रण ैंमसकहै, ो। 4 झमें बनरहऔर ैं ममें। यदि खलतें बनरहे, अपनआपसफल नहीं सकती, यदि झमें बनरहो, फल नहीं सकते। 5 ैं खलतूँ, िाँ ो। झमें बनरहतऔर ैं उसमें, वह बहफल ै, ोंि झसअलग कर नहीं कर सकते। 6 यदि झमें बनरहे, वह समहर ेंिऔर ै, िउनें इकटकरकआग ें ोंैं और जल ैं। 7 यदि झमें बनरहऔर वचन ममें बनरहें, ाँऔर वह िएगा। 8 िमहिइसि बहफल और िबनरहो।15:8 कुछ हस्तलेखों में इस पद का अनुवाद इस प्रकार है : "... कि तुम बहुत सा फल लाओ, तभी तुम मेरे शिष्य होगे।"

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