17 और वह स्वयं अपना क्रूस उठाए उस स्थान की ओर निकल पड़ा जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है और जिसे इब्रानी में गुलगुता कहा जाता है। 18 वहाँ उन्होंने उसे और उसके साथ दो अन्य मनुष्यों को भी क्रूस पर चढ़ाया, एक को इस ओर, दूसरे को उस ओर, तथा बीच में यीशु को। 19 पिलातुस ने एक दोषपत्र भी लिखकर क्रूस पर लगवा दिया; उस पर लिखा था : यीशु नासरी, यहूदियों का राजा।
23 जब सैनिकों ने यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया तो उन्होंने उसके वस्त्रों को लेकर उनके चार भाग किए, प्रत्येक सैनिक के लिए एक भाग; और कुरता भी लिया, परंतु वह कुरता बिना सिले पूरा ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था। 24 इसलिए उन्होंने आपस में कहा, "हम इसे न फाड़ें, बल्कि इसके लिए पर्ची डाल लें कि यह किसका होगा।" जिससे कि पवित्रशास्त्र का यह लेख पूरा हो :
उन्होंने मेरे वस्त्र आपस में बाँट लिए
और मेरे कपड़े के लिए पर्ची डाली।19:24 भजन 22:18
अतः सैनिकों ने ऐसा ही किया।
क्रूस के निकट यीशु की माता
25 अब यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहन, क्लोपास की पत्नी मरियम और मरियम मगदलीनी खड़ी थीं। 26 जब यीशु ने अपनी माता और शिष्य को, जिससे वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखा, तो अपनी माता से कहा,"हे नारी, देख, तेरा पुत्र।" 27 फिर उसने उस शिष्य से कहा,"देख, तेरी माता।" और उसी समय से वह शिष्य उसे अपने घर ले गया।
यीशु की मृत्यु
28 इसके बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है, कहा,"मैं प्यासा हूँ।" जिससे कि पवित्रशास्त्र का लेख पूरा हो। 29 वहाँ सिरके से भरा एक बरतन रखा था। तब उन्होंने उस सिरके से भरे स्पंज को जूफे की टहनी पर रखकर उसके मुँह पर लगाया। 30 जब यीशु ने सिरका ले लिया तो कहा,"पूरा हुआ।" और सिर झुकाकर अपना प्राण त्याग दिया।