25 अतः अन्य शिष्य उससे कहने लगे, "हमने प्रभु को देखा है।" परंतु उसने उनसे कहा, "जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के छेद न देख लूँ और उन कीलों के छेद में अपनी उँगली न डाल लूँ और उसकी पसली में अपना हाथ न डाल लूँ, तब तक मैं बिलकुल विश्वास नहीं करूँगा।"
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