14 अभी आधा पर्व ही बीता था कि यीशु मंदिर-परिसर में जाकर उपदेश देने लगा। 15 तब यहूदी चकित होकर कहने लगे, "बिना सीखे वह कैसे विद्या जानता है?" 16 इस पर यीशु ने उनसे कहा,"यह शिक्षा मेरी अपनी नहीं बल्कि मेरे भेजनेवाले की है। 17 यदि कोई परमेश्वर की इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस शिक्षा के विषय में जान जाएगा कि यह परमेश्वर की ओर से है या मैं अपनी ओर से बोलता हूँ। 18 जो अपनी ओर से बोलता है वह अपनी प्रशंसा चाहता है, परंतु जो अपने भेजनेवाले की प्रशंसा चाहता है वह सच्चा है, और उसमें कोई अधर्म नहीं।