प्रभु की प्रार्थना
1 फिर ऐसा हुआ कि यीशु किसी स्थान पर प्रार्थना कर रहा था, और जब वह कर चुका, तो उसके शिष्यों में से एक ने उससे कहा, "प्रभु, हमें प्रार्थना करना सिखा, जैसे यूहन्ना ने भी अपने शिष्यों को सिखाया था।"
2 तब उसने उनसे कहा,"जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो :
हे पिता, 11:2 कुछ हस्तलेखों में "हे पिता" के स्थान पर "हे हमारे पिता तू जो स्वर्ग में है" लिखा है।
तेरा नाम पवित्र माना जाए;
तेरा राज्य आए। 11:2 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो" लिखा है।
3 हमारी दिन भर की रोटी प्रतिदिन हमें
दिया कर।
4 हमारे पापों को क्षमा कर,
क्योंकि हम भी अपने प्रत्येक अपराधी
को क्षमा करते हैं;
और हमें परीक्षा में न पड़ने दे 11:4 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "बल्कि बुराई से बचा" लिखा है। ।"
माँगो, ढूँढ़ो, खटखटाओ
5 फिर उसने उनसे कहा :"तुममें से ऐसा कौन है जिसका एक मित्र आधी रात को उसके पास जाए और उससे कहे, ‘मित्र, मुझे तीन रोटियाँ दे, 6 क्योंकि मेरा एक मित्र यात्रा करता हुआ मेरे पास आया है और उसके सामने परोसने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है।’ 7 और वह भीतर से उत्तर दे, ‘मुझे तंग न कर; द्वार पहले ही बंद है, और मेरे बच्चे मेरे साथ बिस्तर पर हैं; मैं तुझे उठकर कुछ नहीं दे सकता।’ 8 मैं तुमसे कहता हूँ, यदि वह उसका मित्र होने पर भी उठकर उसे न दे, फिर भी उसके आग्रह करते रहने के कारण उसकी जितनी आवश्यकता हो उठकर उसे देगा।
9 "मैं तुमसे कहता हूँ, माँगो और तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो और तुम पाओगे; खटखटाओ और तुम्हारे लिए खोला जाएगा। 10 क्योंकि प्रत्येक जो माँगता है उसे मिलता है, और जो ढूँढ़ता है वह पाता है, और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। 11 तुममें से कौन ऐसा पिता होगा जिसका पुत्र मछली माँगे और वह मछली के बदले उसे साँप दे? 12 या अंडा माँगे, तो उसे बिच्छू दे? 13 इसलिए, यदि तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्हारा पिता जो स्वर्ग में है, उससे भी बढ़कर अपने माँगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।"