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लूका रचित सुसमाचार 18:1,7,8

HSB Hindi Standard Bible

विधवा और अधर्मी न्यायाधीश का दृष्‍टांत

1 फिर यीशु ने उनसे इस विषय में कि सदा प्रार्थना करना और निराश न होना कितना आवश्यक है, एक दृष्‍टांत कहा :

7 तो क्या परमेश्‍वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा जो दिन और रात उसे पुकारते रहते हैं? क्या वह उनके विषय में देर करेगा? 8 मैं तुमसे कहता हूँ कि वह शीघ्र उनका न्याय चुकाएगा। फिर भी जब मनुष्य का पुत्र आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्‍वास पाएगा?"

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    1 तब प्रभु येशु ने शिष्यों को यह समझाने के उद्देश्य से कि निराश हुए बिना निरंतर प्रार्थना करते रहना ही सही है, यह दृष्टांत प्रस्तुत किया.

    7 तब क्या परमेश्वर अपने उन चुने हुओं का न्याय न करेंगे, जो दिन-रात उनके नाम की दोहाई दिया करते हैं? क्या वह उनके संबंध में देर करेंगे? 8 सच मानो, परमेश्वर बिना देर किए उनके पक्ष में सक्रिय हो जाएंगे. फिर भी, क्या मनुष्य के पुत्र का पुनरागमन पर विश्वास बना रहेगा?"

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    1 फिर उसने इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और साहस नहीं छोड़ना चाहिए उनसे यह दृष्टान्त कहा:

    7 अतः क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उसकी दुहाई देते रहते; और क्या वह उनके विषय में देर करेगा? 8 मैं तुम से कहता हूँ; वह तुरन्त उनका न्याय चुकाएगा; पर मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?"

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